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साधौ ये मुर्दों का गांव
मुनाफे की नीति बनी नहीं
सरकारों ने किसान के चरित्र का जो खांका खींच रखा है उसमें वह दरिद्र ही दिखाई देता है। नंगे पैर, घुटनों तक धोती, चेहरे पर धंसी हुई आंखें और पिचके हुए गाल, झुर्रियों को समेटता बदन। बार-बार हाथ फैलाकर कभी आसमान से भीख मांगता तो कभी सरकारों से।
तेलंगाना में विवादित फैसला
बालिक बचाओ, बालिका बचावो। इस सूत्रवाक्य का पूरे देश में पालन किया जा रहा है। सरकारें चाहे वह केंद्र की हो या राज्यों की सभी बालिकाओं के मामले में सहानुभूति का रवैया अपनाए हुए हैं, बालिकाओं को लेकर जिस तरह का माहौल है उस पर सभी चिंतित हैं और कोशिश की जा रही है कि बदलाव आए
झूठ के पांव...
झूठ के पांव... कहावत है झूठ के पांव नहीं होते। इसे किस संदर्भ में कहा गया होगा यह तो नहीं पता लेकिन अब तो झूठ के पांव नहीं बल्कि पंख भी हैं। ऐसा ही एक और शब्द है जिसे आम बोलचाल में प्रयोग में लाते हैं वह है सफेद झूठ। यानि की झूठ में भी सच। झूठ बोलने की भी एक कला है यह सभी से बोला नहीं जाता।
ये बदलाव अच्छे हैं...
बहुत पहले दाउदी बोहरा समाज ने शादी विवाह कार्यक्रमों में दिखावे और अन्न की बर्बादी को रोकने के लिए मीनू तय कर दिया था इसके बाद जैन समाज ने भी इस ओर कदम बढ़ाए। अब अन्य समाजों में भी इस तरह का अनुशासन अनिवार्य किया जा रहा है।
मां कहती है कि ऐसा पता होता.
तो बचपन में ही तेरा गला घोंट देती। ऐसी औलाद से बेऔलाद होना ही अच्छा था यह दर्द तो जीवन भर सह सकती थी लेकिन जो दर्द तू दे रहा है वह मौत से भी बद्तर है।
अभियानों की बाढ़...
बिना झूठ राजनीति की नहीं जा सकती, जो जितना अधिक और बड़ा झूठ बोलता है वह बड़ा नेता बन जाता है। बशर्ते झूठ बोलने की कला आनी चाहिए और इसे इस तरह से प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि गलती से भी सच निकल जाए तो उसे लोग झूठ मान लें। यानि झूठ को सच की तरह परोसने मेंं सिद्धहस्त होना जरूरी है।
राजनीतिक दलों पर नकेल
आखिर नोटबंदी से आमजनता ही क्यों परेशान हो, उसे ही क्यों कर तरह की परेशानियां झेलना पडेंÞ, देश के विकास में उनकी आहुति यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मांग रहे हैं तो फिर राजनीतिक दलों को छूटें क्यों दी जाएं। यह तो कोई बात नहीं कि
नोटबंदी: बार बार नियम बदलने से संदेह
नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार बेहद खुश है, वह इसे देश के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और देश को एक ऐसी व्यवस्था की ओर ले जाना चाहते हैं जहां बटुए में नोट न रखना पड़े। चूंकि सरकार बहुमत में है और विपक्ष
बालिका पढ़ाई में पिछड़ा मप्र
ऐसा कोई क्षेत्र शेष नहीं बचा जहां यह कहा जा सके कि देश में मध्यप्रदेश की हालत अव्वल है। हर दिन कोई सर्वे रिपोर्ट या फिर सरकारी दस्तावेज सामने आते हैं जिसमें मध्यप्रदेश की गिरती हालत को चिंहित किया जाता है। अब तक जो भी रिपोर्टें मध्यप्रदेश के संदर्भ
हरियाली पर आरी
विकास है तो विनाश होगा। यह सच है लेकिन विकास की तो कोई सीमा नहीं होती उसी तरह विनाश भी अंतहीन होता है। इन दोनो के बीच आपसी समझौता संभव नहीं है इसका अर्थ यह है कि विकास के नाम पर विनाश की आरी निर्बाध गति से चलती
राजनीतिक दलों को छूट पर संदेह
राजनीति में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता सब आपस में दोस्त होते हैं और यह दोस्त दोस्ती निभाने में ईमानदार रहते हैं। आम लोगों को राजनीतिक दलों के बीच भले ही दुश्मनी दिखाई देती हो पर हकीकत में ऐसा नहीं होता, वैचारिक मतभेद
पालना बंद करें अलगाववादियों को
ऐसे ही नहीं बन गई अम्मां
वैसे तो कई फिल्मी सितारों ने राजनीति में किस्मत आजमाई लेकिन बहुत कम ऐसे हैं जो सफल हुए और किसी मुकाम तक पहुंचे। जयललिता ने फिल्म और राजनीति में अपना दबदबा बनाए रखा। इंदिरा गांधी के बाद वह पहली महिला नेता थीं जिनके आगे
ई-पेमेन्ट, ध्यान देने की जरूरत
जब बात बिगड़ जाती है या बड़ा घोटाला हो जाता है आम आदमी लुट पिट जाता है तब सरकार को होश आता है और फिर नियम कायदे बनने, बनाने पर विचार शुरू होता है। प्रारम्भिक दौर में ही व्यवस्थाओं को पुख्ता करने का काम कभी नहीं किया जाता।
बिना नकदी कैसा बटुआ
जेब में पर्स हो तो फिर उसमें नकदी भी रहना चाहिए, बिना नोटों के बटुआ कैसा। भारतीय समाज में तो बटुए में नकदी लेकर चलने की आदत रही है और यह आदत इतनी आसानी नहीं छूटने वाली, लेकिन प्रधानमंत्री जी चाह रहे हैं कि लोग बटुए में सिर्फ प्लास्टिक नोट लेकर ही चलें यानि एटीएम, डेबिट कार्ड इत्यादी।
बिना शिक्षक चल रहे स्कूल
मप्र में 4 हजार 837 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं यानि यहां बिना शिक्षकों के ही बच्चे पढ़ रहे हैं। इस रिपोर्ट पर केंद सरकार का मानव संसाधन मंत्रालय हैरान है और उसने तत्काल शिक्षकों की भर्ती करने का फरमान जारी कर दिया है।
रोज बदलते नियम
नोटबंदी पर सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अब पेट्रोल पंपों और हवाई अड्डों पर 500 रुपये के पुराने नोट दो दिसंबर तक ही स्वीकार किये जायेंगे, पहले यह समयसीमा 15 दिसंबर तक थी। हालांकि 30 दिसंबर तक बैंकों में जाकर 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदल सकते हैं।
संसद तक सिमटा विपक्ष
लगता है कि अब वह जमाना नहीं रहा जब विपक्षी दलों की बात को महत्व दिया जाए। विपक्ष अब सड़कों पर ताकतवर नहीं रहा वह सिर्फ संसद तक सीमित है, वहां शोर शराबा, हंगामा कर कार्यवाही को रोकने में सफल हो सकता है लेकिन उसकी
हिंदी मातृ भाषा या मात्र भाषा ?
हिन्दी दिवस हम भले ही मना रहे है परन्तु हिन्दी भाषा की स्थिति दयनीय होती जा रही है और तो और नई पीढ़ी हिन्दी को मात्र भाषा समझते है
दाह संस्कार कहां करें
आजादी के बाद देश में अभी तक कुछ ऐसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं जिन पर न कभी विचार किया जाता है और न ही यह कभी सरकारों की प्राथमिकता में शामिल है। कभी यह समस्याएं चुनावी एजेन्डे में शामिल नहीं की जाती।
जो भाजपा नहीं कर सकी स्वाति ने कर दिखाया
सच है यदि पति के स्वाभिमान की रक्षा के लिए यदि पत्नी खड़ी हो जाए तो अच्छे अच्छों की दुम दबती दिखाई देने लगती है। राज्यसभा सांसद दयाशंकर सिंह को बसपा नेता मायावती पर की गई टिप्पणी को लेकर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में भाजपा ने जितनी जल्दबाजी दिखाई जैसे मानों भूचाल आ गया हो।
दलित ही हैं लोकतंत्र का आधार
यदि भारत में दलितों को ही लोकतंत्र का आधार मान लिया गया है तो सवर्ण कही जाने वाली जातियों को इस व्यवस्था से किनारा कर लेना चाहिए। यदि दलितों के वोट पर ही सरकारें बन रही हैं तो फिर सवर्ण जातियों को वोट देने का औचित्य क्या है।
कठोर हो भ्रष्टाचार की सजा
कठोर हो भ्रष्टाचार की सजा भ्रष्टाचार को रोकने के जितने भी प्रयास किए जा रहे हैं वह नाकाफी हैं इनसे संतोषजनक परिणाम मिलने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। क्योंकि भ्रष्टाचार करने वालों को सजा देने में अब भी सरकारें कंजूसी कर रही हैं, वर्षों पुराने नियम कायदों के तहत सजाएं तय होती हैं जो इस पर लगाम नहीं कस सकतीं।
सियासत में फंस गए रामलला
बाबरी मस्जिद के सबसे बुजुर्ग मुद्दई हाशिम अंसारी के निधन से राम मंदिर विवाद का एक युग समाप्त हो गया है। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनके जीते जी रामलला का मंदिर बन जाए लेकिन वह अधूरी रह गई। याद है एक बार उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि रामलला की दुर्दशा अब देखी नहीं जाती उन्हें आजाद देखना चाहता हूं।
मानसून, सावधानी बरतें
इस समय पूरे मध्यप्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है जहां देखो वहां तबाही दिखाई दे रही है। सड़क मार्ग बाधित हैं, नाले और नदियों का पानी खतरे के करीब पहुंच चुका है। बरसाती नाले तो उफान पर हैं
परेशानी से सबक लें
प्रकृति पर किसी का जोर नहीं चलता, वह अपनी मर्जी की मालिक है लेकिन हमे तो सचेत रहना चाहिए, हम यह क्यों भूल जाते हैं कि अपनी सुविधा के लिए जिन विकल्पों को तैयार कर रहे हैं वही एक दिन मुशीबत का कारण बन सकते हैं।
मानसून की मेहरबानी
पूरे प्रदेश में बादलों की जमावट को लेकर कई बार अंदेशा होने लगा था कि इस बार भी मानसून कही धोखा न दे जाए। आमतौर पर जैसा कि होता है बारिश के लिए पूजा और टोकटे भी शुरू हो गए थे। प्रार्थना कुबूल हुई और बादलों ने ऐसा धमाल मचाया कि पूरे सीजन में जितना पानी गिरता है दो दिनों में ही पूरा हो गया।
उत्तर प्रदेश फतह की चौसर
उत्तर प्रदेश में चुनाव संभवत: दिसम्बर या फरवरी में होंगे, पर अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, फिर भी यहां का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी के बसपा छोड़ देने से यहां का माहौल कुछ अधिक गरम दिखाई दे रहा है।
बाबू कैसे बन गए करोड़पति
भष्टाचार पर लगाम कसने के जितने भी प्रयास हुए वह सब नाकाफी हैं। सरकार भले ही कहती हो कि वह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठा रही है लेकिन इसके परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। सरकारी विभागों के हर दफ्तर में हर टेबिल पर भ्रष्टाचार का पेपरवेट रखा हुआ है। दलालों के बिना काम कराना आज भी आसान नहीं है।
पाक से रिश्ते सुधारने का प्रयास
भारत हमेशा अपनी ओर से पाकिस्तान से दोस्ताना रिश्ते बनाने की कोशिशें करता रहा है लेकिन पाक की ओर से कभी ऐसे प्रयास नहीं किए गए। पाक के नेता चाहे वह प्रधानमंत्री हों या फिर मंत्रिमंडल के सदस्य भारत की ओर दोस्ताना हाथ बढ़ाने से पहले अपने नाखूनों की धार को तेज कर लेते हैं
शिकायत बिना हो कार्यवाही
सौ लोग परेशान हैं लेकिन उनमें से एकाध ही ऐसा होता है जो शिकायत करने का जोखिम उठाता है। जोखिम इसलिए कि हमारे सिस्टम में गोपनीयता नाम की चीज नहीं है। पुलिस हो या फिर सरकारी विभाग लिखित शिकायत पर ही कार्यवाही करते हैं, क्योंकि उन्हें आधार चाहिए कार्यवाही करने के लिए।
बड़वानी कांड सरकार की गलती
सरकार ऐसे मामलों में सीधे चिकित्सक को दोषी ठहरा देती है और कार्रवाई कर उसे या तो निलंबित कर दिया जाता है या नौकरी से निकाल दिया जाता है, जबकि चिकित्सक की कोई गलती नहीं होती वह अपने दायित्व का निर्वाह ईमानदारी से करता है।
तो गोली क्यों नहीं मार देते
आतंकवादी संगठन आईएसआईएस भारत में घुसपैठ का मौका देख रहा है वह सीमापार से पाक आतंकियों को मदद करने के लिए बेताब है, उसने मदद करना शुरू कर दी है। भारतीय सेना के अधिकारी और गुप्तचर तंत्र इस मामले में सरकार को लगातार सूचनाएं देकर आगाह कर रहा है।
देश का समय बर्बाद कर रही संसद
देश की संसद में इन दिनों एक ऐसे मुद्दे पर नरम गरम बहस चल रही है जिस पर काफी समय से देश में उबाल आया हुआ है,यह शब्द है असहिष्णुता। कांग्रेस इसे लेकर चिंतातुर है वह इस बहस को विपरीत दिशा में भटका रही है,
हमारी चोटों का बदला ले रहा है मौसम
यह दिसम्बर का महीना है और गुलाबी ठंड का रास्ता देख रहे हैं जबकि रजाइयों में रात में दुबकने और दिन भर गर्म कपड़े लादे रहने का यह महीना है। दूसरी ओर चेन्नई में सौ साल का रिकार्ड टूट गया बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है, शहर समुन्दर में तब्दील हो गए हैं।
कर्ज और फर्ज की राजनीति
एक मां अपने पुत्र को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और शक्तिशाली राष्ट्र की बागडोर सौपनें को बेताब है। इस महिला की जीवटता को नमन करने का मन करता है क्योंकि इसने पति के मौत के बाद अपने देश जाने का मन नहीं बनाया, वह पीठ दिखाकर भागी नहीं
फारूख बिगाड़ रहे हैं घाटी का माहौल
जम्मू- कश्मीर जब भी पटरी पर आता दिखाई देता है, सैलानी डल झील की सैर के लिए आने को उतावले होने लगते हैं, कश्मीरी जनसमुदाय आतंक के साये से बाहर निकलने लगता है तभी यहां के नेता ऐसा माहौल तैयार करने लगते हैं कि शांतिप्रयासों को धक्का लगता है और विकास योजनाओं की गति थम जाती है।