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साधौ ये मुर्दों का गांव

शिकायत बिना हो कार्यवाही

शिकायत बिना हो कार्यवाही
सौ लोग परेशान हैं लेकिन उनमें से एकाध ही ऐसा होता है जो शिकायत करने का जोखिम उठाता है। जोखिम इसलिए कि हमारे सिस्टम में गोपनीयता नाम की चीज नहीं है। पुलिस हो या फिर सरकारी विभाग लिखित शिकायत पर ही कार्यवाही करते हैं, क्योंकि उन्हें आधार चाहिए कार्यवाही करने के लिए। सिस्टम डरता है कि कही जिसके खिलाफ वह कार्यवाही करने जा रहा हो कहीं उस पर भारी न पड़ जाए। नियम-कायदे, कानून सब हैं लेकिन इसके बाद भी सिस्टम के हाथों में हथकड़ी लगी है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण अर्थात एनजीटी के हालिया निर्णय की बात करें। अभिकरण ने शादी बारात में डीजे बजाने को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, अभिकरण ने इस मामले में तमाम दलीलों को नामंजूर करते हुए डीजे संचालकों को और समय देने से इंकार कर दिया है। इस मामले में गत 18 मई को अभिकरण ने डीजे संचालकों को छह माह का समय दिया था, तब तर्क दिया गया था कि बुकिंग हो चुकी हैं ऐसे में आर्थिक नुकसान होगा तब उनकी बात को मान्य किया गया था लेकिन इस वक्त के गुजर जाने के बाद भी स्थितियां नहीं बदलीं। यह समय शादी- बारातों का है और डीजे वालों ने बुकिंग कर रखी है जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना था क्योंकि अभिकरण ने उन्हें छह माह का वक्त दिया था। अब डीजे संचालक फिर से चाहते हैं कि कैसे भी उन्हें मोहलत मिल जाए तो वह अपना धंधा कर लें। एनजीटी ने वकीलों की तमाम दलीलों को खारिज कर प्रदेश में रात्रि 10 से सुबह 6 बजे तक डीजे बजाने को गैरकानूनी घोषित कर दिया है और इसे तत्काल प्रभाव से प्रदेशभर में लागू कर दिया है। एनजीटी का निर्णय सामने है लेकिन इसमे दिक्कत यह है कि जिनको डीजे से परेशानी हो वह पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास शिकायत कर सकता है। सवाल यह है कि शिकायत करने की जुर्रत आखिर कौन करेगा, क्योंकि शादी- बारात के मामले में लोग इस तरह की परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरा सवाल यह है कि शिकायत को सुनने वाली एजेन्सियां कितनी देर में कार्यवाही करेंगीं क्योंकि जिन्हें इस पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है क्या वह इतने सक्षम हैं कि एक फोन पर मौके पर पहुंच जायेंगे और संबंधित शिकायतकर्ता का नाम उजागर नहीं करेंगे। सवाल यह भी है कि ऐसे मामलों में शिकायत की आखिर जरूरत क्या है पुलिस सड़कों पर रहती है तो क्या उसका अधिकार नहीं कि वह संबंधित पर कार्यवाही करे। जब कोई कार्य गैरकानूनी घोषित कर दिया गया हो तब शिकायत की जरूरत नहीं। एनजीटी के इस आदेश में शिकायत वाली बात ही तो छूट का रास्ता दिखा रही है। न शिकायत होगी न कार्यवाही की जायेगी। मतलब डीजे बजते रहेंगे, शोर होता रहेगा और प्रशासन ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए मशीनों का प्रस्ताव रख देगा, यह प्रस्ताव अटका रहेगा। पुलिस और न ही स्थानीय प्रशासन की इतनी हिम्मत है कि वह दस बजे के बाद शादी-बारात और अन्य आयोजनों में बजने वाले डीजे को जब्त नहीं राजसात कर सके। यह गैर कानूनी काम रोज होगा और कार्यवाही करने के लिए जिम्मेदार भ्रष्टाचार करेंगे। यह सच्चाई है कि जिन कार्यों को गैरकानूनी घोषित किया जाता है वही सबसे अधिक किए जाते हैं इसलिए एनजीटी को इस पर रोज अपडेट लेना होगी और कुछ पर नकेल कसना होगी।

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