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साधौ ये मुर्दों का गांव

मानसून, सावधानी बरतें

मानसून, सावधानी बरतें इस समय पूरे मध्यप्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है जहां देखो वहां तबाही दिखाई दे रही है। सड़क मार्ग बाधित हैं, नाले और नदियों का पानी खतरे के करीब पहुंच चुका है। बरसाती नाले तो उफान पर हैं जिनके कारण कई रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं और इनका पानी आस पास के क्षेत्रों में तबाही मचा रहा है। कई इलाकों में लोगों के पास रहने खाने को नहीं बचा है कई स्थानों पर लोग फंसे हुए हैं और उन्हें मदद पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालात बेहद खराब हो चुके हैं ऐसी हालात में प्रशासन और सरकार द्वारा की जा रही आपदा व्यवस्थाएं नाकाफी हो गई हैं। बाढ़ और भीषण बारिश के कारण हर पल अप्रिय खबरें सामने आ रही हैं लोग प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि एक साथ पूरे प्रदेश में बिगड़े हालात को नियंत्रित करने के लिए संसाधनों की कमी है। बचाव के न तो प्रशिक्षित लोगों की टीम है और न ही संसाधन। प्रशासन बार बार अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने को कह रहा है पर ग्रामीण क्षेत्रों में तो कहीं कोई ऐसा सुरक्षित स्थान नहीं बचा है जहां जान माल की सुरक्षा की जा सके। इसके अलावा पशुधन पर भी इस बारिश का खासा असर हुआ है कई स्थानों पर लोगों ने मवेशियों को खुले में छोड़ दिया है जिससे कि वह अपना स्वयं बचाव कर सकें। सरकार दावा कर रही है कि आपदा से निपटने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है लेकिन ऐसा नहीं है हर जगह मदद के लिए चीख पुकार मची हुई है लेकिन मदद उन तक नहीं पहुच पा रही है। पुलिस के होमगार्ड को कई स्थानों पर तैनात किया गया है पर यह सिर्फ लोगों को पानी के करीब जाने से रोकने के लिए हैं। सुरक्षा उपकरणों की कमी साफ दिखाई दे रही है वहीं चिकित्सालयों को भी इस तरह की आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयार नहीं कराया गया था जिसके कारण लोग परेशान हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं और चिकित्सकों की टीम तैनात कर दी गई है पर सूचनाएं इस दावे के विपरीत मिल रही हैं। शहरों के डीनेज सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, पानी का भराव सिर्फ इस सिस्टम के न होने के कारण हुआ है। शहरों में सड़के पानी से डूबी हुई हैं इनका पानी निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है बल्कि सड़क के दोनो ओर पक्की दीवार हैं जो पानी की निकासी को रोके हुए है। कहीं भी सड़कों के दोनों सिरों पर पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। इस तकनीकी खामी पर कई बार ध्यान दिलाया जा चुका है लेकिन सुना नहीं गया। मानसून की बारिश से होने वाली तबाही का सामना लोगों को ही करना है इसलिए सलाह तो यही है कि वह स्वयं सक्रिय हों और सावधानी बरतें। स्वयं आस पास रुके पानी को निकलने के लिए रास्ता बनाएं और कहीं पानी का अधिक बहाव हो तो किसी तरह का जाखिम न उठाएं। बच्चों का विशेष तौर पर ख्याल रखें वह पानी में मस्ती करने के लिए या कही भरे पानी या बहते पानी के पास न जाएं। घरों की छतों पर बहुत ही सावधानी से जाएं। इतना ही नहीं पानी के मनोरम दृश्य देखने लिए यदि कहीं जा रहे हैं तो सुरक्षा और सावधानी का पूरा ख्याल रखें क्योंकि पानी किसी तरह की दोस्ती नहीं निभाता। घरों में बिजली के तारों से खासतौर से जहां खुले हुए तार हैं वहां जरूर टेपिंग करा दें और इनसे दूरी बनाए रखें। स्लम एरिया जहां बिजली असुरक्षित तरीके से उपयोग की जाती है लोग स्वयं ख्याल रखें। कच्चे और कमजोर मकानों में जमे रहने का मोह तत्काल छोड़ दें। इसके अलावा वाहन चलाते समय सड़क पर किसी तरह की रिस्क न उठाएं। देर से सही घर तो सुरक्षित पहुंच जायेंगे।
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