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साधौ ये मुर्दों का गांव

जो भाजपा नहीं कर सकी स्वाति ने कर दिखाया

जो भाजपा नहीं कर सकी स्वाति ने कर दिखाया
सच है यदि पति के स्वाभिमान की रक्षा के लिए यदि पत्नी खड़ी हो जाए तो अच्छे अच्छों की दुम दबती दिखाई देने लगती है। राज्यसभा सांसद दयाशंकर सिंह को बसपा नेता मायावती पर की गई टिप्पणी को लेकर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में भाजपा ने जितनी जल्दबाजी दिखाई जैसे मानों भूचाल आ गया हो। भाजपा ने दया के पक्ष में एक पल भी खड़ा होना उचित नहीं समझा, जबकि ऐसी बातें हजारों बार होती रही हैं, नेता एक दूसरे पर अनर्गल शब्दों का प्रयोग करते रहे हैं लेकिन मायावती के सामने भाजपा ने जिस तरह से घुटने टेके हैं वह उसकी राजनीतिक विफलता और उत्तरप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर छुपा हुआ डर है। भाजपा इतनी कमजोर होगी इसका अंदेशा नहीं था, देखा जाए तो वर्तमान भाजपा का नेतृत्व देखने में ही भले ही ताकतवर दिखाई दे रहा हो, पर ऐसा है नहीं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास लड़ने की क्षमताएं नहीं हैं। खैर जो काम भाजपा नहीं कर सकी उस काम को दया की पत्नी स्वाति ने कर दिखाया उन्होंने अपने,अपनी बेटी और पति के स्वाभिमान की रक्षा के लिए मायावती को जिस तरह से चुनौती दी है। माया के हौसले पस्त हो गए हैं स्वाति ने माया को उनकी औकात दिखा दी है। बीते दिन स्वाति ने माया पर जिस तरह से प्रहार किए हैं वह एक आम भारतीय नारी का स्वाभाविक गुस्सा है वह अपने पति के साथ अपनी बेटी को लेकर चिंतित हैं उन्होंने माया को आडेÞ हाथ लेते उनके देवी बनने के ढकोसले का पर्दाफाश कर दिया। यह काम भाजपा को करना था उसे दया के पक्ष में खड़ा होना था लेकर बुजदिलों की तरह पीठ दिखाकर वह भाग गई। अब स्वाति के तेवरों के आगे माया की बोलती तो बंद ही है भाजपा के नेताओं को भी बगलें झांकना पड़ रही है। माया ने इस पूरे प्रकरण को दलित कार्ड के रूप में खेला और उत्तरप्रदेश में अपने जनाधार को मजबूत करने में जुट गईं लेकिन स्वाति ने उनके मिशन को फ्लाप करके रख दिया है। स्वाति चिंतित हैं क्योंकि उनकी बेटी इस बसपाइयों की टिप्पणियों से आहत है और डिपे्रशन में है। स्वाति ने साफ कहा कि वह अपनी बेटी की इस दशा का बदला जरूर लेंगीं, अब उनकी हुकांर के समर्थन में महिला संगठन भी खड़े हो गए हैं यहां तक कि राजनीतिक दलों की महिला विंग भी। स्वाति का राजनीति से कोई लेना देना नहीं पर भाजपा अब उनके तेवरों को भुनाने की मानसिकता बना रही है उप्र भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो दयाशंकर की पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। खैर यह तो राजनीतिक पैतरेबाजी है लेकिन इस पूरे प्रकरण में स्वाति ने जो रोल निभाया है उससे भारतीय नारी के मस्तक को ऊंचा उठा है और राजनीति करने वालों की पोल खुली है कि वह अपने राजनीतिक स्वार्थो के लिए किस हद तक जा सकते हैं। इधर तेजी से बदले घटनाक्रम में अब बसपा के कुछ कद्दावर नेता भी मायावती के खिलाफ हो गए हैं उनका साफ कहना है कि स्वाति सिंह के परिवार पर रैली के दौरान की गर्इं टिप्पणियां अशोभनीय हैं। साफ है कि अब माया अपनी ही माया में फंसती जा रही हैं।

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