Powered By डॉ.राहुल रंजन
साधौ ये मुर्दों का गांव

ई-पेमेन्ट, ध्यान देने की जरूरत

ई-पेमेन्ट, ध्यान देने की जरूरत
जब बात बिगड़ जाती है या बड़ा घोटाला हो जाता है आम आदमी लुट पिट जाता है तब सरकार को होश आता है और फिर नियम कायदे बनने, बनाने पर विचार शुरू होता है। प्रारम्भिक दौर में ही व्यवस्थाओं को पुख्ता करने का काम कभी नहीं किया जाता। जब नई व्यवस्था लागू करने के लिए सरकार प्रोत्साहित कर रही है तो फिर उसे इस व्यवस्था होने वाले नुकसान की भी जांच पड़ताल कर लेना चाहिए। इन दिनों नोटबंदी के बाद सरकार का पूरा ध्यान कैशलेश व्यवस्था पर है वह प्रोत्साहित कर रही है कि लोग तमाम खरीददारी के लिए इस नई व्यवस्था को अपनाएं। सरकार की अपनी सोच है कि इससे कर की चोरी पर लगाम लग जायेगी, और सरकारी खजाने में पर्याप्त धन आता रहेगा। सरकार अपना लाभ तो देख रही है लेकिन इस व्यवस्था आमलोागों को जुड़ने में अभी वक्त लगेगा। यह भी गौर करना होगा कि ग्रामीण भारत में इसे कैसे सामान्य बनाया जा सकता है क्योंकि यह नेट आधारित व्यवस्था है और वर्तमान में ग्रामीण भारत सौ फीसदी इससे जुड़ा नहीं है। आज भी नेट निर्बाध गति से नहीं चलता, शहरी क्षेत्रों में ही लोग परेशान रहते हैं फिर ग्रामीण क्षेत्रों के हालातों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जहां तक ई पेमेन्ट के लिए जिन संसाधनों का विकल्प अभी सामने है उनकी पहुंच भी ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है। इसके अलावा मौका देख कई कंपनियां इस क्षेत्र में कूद गई हैं इन कंपनियों की वैधता के बारे में सरकार ने भी स्पष्ट नहीं किया है यहां तक कि आरबीआई की गाइड लाइन भी अभी स्पष्ट नहीं है। प्रायवेट कंपनियां किसी तरह की समाजसेवा या भारत के उत्थान या फिर प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने के लिए सामने नहीं आई हैं बल्कि यह विशुद्ध बिजनेश करेंगी। यह इससे करोड़ो कमायेगीं। इन कंपनियों के व्यवसाय पर सरकार का नियंत्रण किस तरह से होगा यह तय नही किया जा सका है। ये कंपनियां मोदी के फोटो के साथ विज्ञापन कर रहीं हैं। सोचें कि विज्ञापन करोड़ों के होते हैं आखिर इतना पैसा ये कंपनियां खर्च क्यों कर रही है, यह सब लोगों से ही बाद में वसूल किया जायेगा। सरकार को ई पेमेन्ट के लिए सरकारी नियंत्रण वाली कंपनियों या फिर राष्ट्रीयकृत बैंकों को ही इसकी अनुमति देने पर विचार करना चाहिए। पैसे की पूरी सुरक्षा होना आवश्यक है और यह काम सरकारी नियंत्रण के बिना संभव नहीं है। प्रायवेट कंपनियों पर सामान्य लोग आसानी से भरोसा नहीं कर सकते, मजबूरी में जरूर इनका उपयोग हो सकता है पर यह स्थाई नही है। निजी कंपनियां भविष्य में आर्थिक गड़बड़ियां करेंगी और फिर सरकार से पूछा जायेगा तो फिर वही रटा रटाया जवाब सुनने को मिलेगा कि हमने ऐसा वैसा तो नहीं कहा था। इसलिए सरकार को अभी से पेमेन्ट की नई व्यवस्था को पुख्ता और सख्त नियम कायदों से जकड़ देना चाहिए जिससे कि आम लोगों का भरोसा इस पर हो सके और उनका पैसा सुरक्षित रहे। अभी इस व्यवस्था में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं जो भरोसा पैदा नहीं करतीं, इस बारे में सुरक्षा एजेन्सियों ने भी सरकार को आगाह कर दिया है। बढ़ते साइबर क्राइम और इससे निपटने के कानूनों में अब भी ढ़ेर दिक्कतें हैं इस तरह के क्राइम को अभी पुलिस को भी समझने में वक्त लगता है, इस क्षेत्र में अपराध करने वाले चूंकि एक्सपर्ट होते हैं इसलिए उन्हें पकड़ने आसान नहीं होता। इसलिए सरकार को इस दिशा में शीघ्रता से विचार करना चाहिए।

Share |