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साधौ ये मुर्दों का गांव

रोज बदलते नियम

रोज बदलते नियम
गुरुवार को नोटबंदी पर सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अब पेट्रोल पंपों और हवाई अड्डों पर 500 रुपये के पुराने नोट दो दिसंबर तक ही स्वीकार किये जायेंगे, पहले यह समयसीमा 15 दिसंबर तक थी। हालांकि 30 दिसंबर तक बैंकों में जाकर 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदल सकते हैं। इसके अलावा दो दिसंबर के बाद से नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में भी 500-1000 रुपये के पुराने नोट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पुराने नोटों से अब आप पेट्रोल पंप और एयर टिकटों की बुकिंग नहीं करा सकेंगे। लेकिन सरकारी अस्पतालों, दवा की दुकानों पर डॉक्टर का लिखा पर्चा दिखाने पर आप 15 दिसंबर तक 500 रुपये के पुराने नोटों से दवा खरीद सकेंगे। इसके अलावा रेलवे टिकट काउंटरों, राज्य की बसों के टिकटों, कंज्यूमर को-आॅपरेटिव स्टोरों पर भी इन नोटों को इस्तेमाल करने की छूट बरकरार रहेगी। सरकार ने कहा है कि पेट्रोल पंप पर ईंधन खरीदने और हवाई अड्डों पर विमान यात्रा के टिकट खरीदने के लिये 500 रुपये के पुराने नोट दो दिसंबर तक ही स्वीकार किये जायेंगे। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि तीन दिसंबर 2016 से सरकारी पेट्रोलियम कंपनी के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल और गैस आदि खरीदने में पुराने 500 रुपये के नोट स्वीकार नहीं किये जायेंगे। इसके अलावा हवाईअड्डों की खिड़की पर हवाई यात्रा के लिये भी तीन दिसंबर से पुराने नोट स्वीकार नहीं किये जायेंगे। सरकार की ओर से रोजाना बदली जा रही व्यवस्थाओं ने लोगों की दुविधा और परेशानियों को बढ़ा दिया है। भले ही यह कहा जा रहा हो कि यह सब कुछ कालाधन को लेकर सक्रिय हुए लोगों पर लगाम लगाने के लिए किया जा रहा है। सरकार की सख्ती के बीच अभी तक बैंकों में भीड़ कम नहीं हुई है लोगों को जितने की जरूरत है उतने रुपये उसे नहीं मिल पा रहे हैं। हर तरफ बंदिशें हैं एटीएम अभी उतने पैसे नहीं उगल रहे हैं जितने की जरूरत है यहां तक कि शहरी क्षेत्रों के कई एटीएम के शटर ही गिरा दिए गए हैं। एक समस्या और यह है कि एटीएम में दो हजार के नोट हैं और इनके खुल्ले बाहर मिल नहीं रहे। हालांकि एटीएम पर कतारे कम हो गई हैं और बाजार में भी पैसा आ गया है लेकिन आर्थिक जीवन सामान्य नहीं हुआ है। देश भक्ति के नाम पर भावनात्मक रूप से नोटबंदी पर समर्थन हासिल करने वाले प्रधानमंत्री के पास इस बात की रिपोर्ट जरूर पहुंच रही होगी कि लोग अब तक समर्थन में थे लेकिन अब आक्रोशित हो रहे हैं। किसानों और गरीबों, गृहणियों, कामकाजी महिलाओं की दिक्कतें बढ़ गई हैं। सरकार घरेलू नौकरों, श्रमिकों आदि को ईपेमेन्ट की बात कर रही है जो कि संभव नहीं है और न ही यह व्यवहारिक है। भारत को ई- पेमेन्ट की आदत और व्यवस्थाएं बनाने में काफी वक्त लगेगा। यह व्यवस्था बहुत से सेक्टर के लिए तो ठीक है लेकिन बहुत जगह अमान्य है। चूंकि भारत में कैश का धंधा करने और बटुए में रुपया रखने की आदत है। सरकार को अभी कुछ करना है पर यह सब कुछ समय के दायरे में हो तो भरोसा कायम रह सकता है अन्यथा भारतीय जनमानष के दिमाग को पढ़ना बेहद मुश्किल है।

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