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कांग्रेस की ऊर्जा का राज? बीजेपी के लिए खतरे का अलार्म..!

निःसंदेह इन दिनों कांग्रेस की सभाओं में भीड़ जुट रही है। तटस्थ होकर कहा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में जितनी भीड़ होती है, उतनी भीड़ राहुल गांधी की सभाओं में तो नहीं हो रही है, लेकिन पहले की अपेक्षा अब राहुल गांधी को लोग गंभीरता से लेने लगे हैं। इस भीड़ को देखकर कांग्रेस पार्टी को यह लगने लगा है कि वह आगामी आम चुनाव में भाजपा को एक बड़ी चुनौती देने में कामयाब हो जाएगी। वैसे कुछ लोगों को राहुल चमत्कारी नेता के रूप में भी दिखने लगे हैं। इस मामले में एक ही बात कही जा सकती है कि पहले की अपेक्षा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल की स्वीकार्यता तो बढ़ी है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना में वे अभी भी बेहद कमजोर हैं।

दरअसल, पिछले दिनों गुजरात के मेहसाना में कांग्रेस की रैली हुई। अनुमान लगाने वालों का कहना था कि राहुल की रैली में कम से कम दो लाख से ज्‍यादा लोग आए थे। याद रहे मेहसाना किसी जमाने में भारतीय जनता पार्टी का गढ़ था। ऐसे में कांग्रेस की सभा में यदि इतनी संख्या जुटती है, तो यह सचमुच में कांग्रेस के लिए आशा जगाने वाली बात है। इन दिनों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी राहुल की सभाएं सफल हुई है। प्रेक्षकों का कहना है कि विगत दिनों पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी राहुल की सभाओं में अच्छी भीड़ देखने को मिली। हालांकि इसके पीछे का कारण क्या है, निश्चत तौर पर तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना तो सही है कि राहुल की सभा में आ रही भीड़ भाजपा के लिए खतरे की घंटी है।

इधर, अभी तक पीएम मोदी और भाजपा यही समझ रहे हैं कि देश की जनता राहुल गांधी को हल्के में ले रही है, लेकिन चित्र बदलने लगे हैं, जिसकी आहट राहुल की सभाओं में जुट रही भीड़ में दिखाई दे रही है। मोटे तौर पर देखा जाए तो राहुल गांधी इन दिनों जबरदस्त मेहनत भी कर रहे हैं। चाहे पार्टी के प्रचार का प्रबंधन कोई भी देखे, लेकिन राहुल की सकारात्मकता का जिस प्रकार प्रचार हो रहा है वह सराहनीय है। हालांकि उत्तर प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो राहुल की सभा में जो भीड़ थी, वह स्थानीय नेताओं के प्रभाव और मेहनत का नतीजा था, लेकिन यह भी सत्य है कि भले ही भीड़ स्थानीय नेता की छवि के कारण जुटी, पर उस भीड़ को बांधकर रखना और कांग्रेस के प्रति विश्वास, कार्यकर्ताओं में उत्साह राहुल गांधी के कारण ही पैदा हो रहा है। यह निःसंदेह राहुल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यही नहीं, इन दिनों राहुल गांधी पहले की अपेक्षा ज्यादा गंभीर भी दिखने लगे हैं। हालांकि प्रतिपक्षी, खासकर भाजपायी उन्हें कई प्रकार की उपमाओं से आज भी अलंकृत कर रहे हैं, लेकिन जिस प्रकार राहुल अपनी छवि तेजी से सुधार रहे हैं, उससे तो यही कहा जा सकता है कि वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं कि नरेंद्र मोदी के सामने राहुल चट्टान की तरह खड़े हो जाएं।

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