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भोपाल

कृषि बाजार से जुड़ेंगी मध्यप्रदेश की 18 मंडियां

कृषि बाजार से जुड़ेंगी मध्यप्रदेश की 18 मंडियां

भोपाल
किसान आंदोलन से झुलस रहे मध्यप्रदेश में किसानों को राहत देने और उनकी उपज के सही दाम दिलवाने के लिए अब राज्य सरकार ने किसान हितैषी निर्णयों पर अमल तेज कर दिया है। मध्यप्रदेश में राष्टÑीय कृषि बाजार योजना के अंतर्गत अब प्रदेश की अठारह नवीन मंडियों को  कृषि बाजार योजना से जोड़ा जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने केन्द्र को प्रस्ताव भेज दिया है। इस योजना से मंडियों के जुड़ने के बाद किसानों की फसल को  स्तर पर बेचा जा सकेगा। कृषि बाजार योजना के पायलट प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र सरकार ने भोपाल की करोंद स्थित कृषि उपज मंडी का सबसे पहले चयन किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान भवन नई दिल्ली से 14 अप्रैल 2016 को भोपाल की करोंद मंडी को इस योजना से जोड़ने की शुरुआत की थी। इसके बाद अप्रैल 2017 तक प्रदेश की पचास मंडियों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है। अब अठारह नई मंडियों को  कृषि बाजार योजना से जोड़ा जा रहा है। 
किसानों को इस तरह मिलेगा फायदा : राष्टÑीय कृषि बाजार से जुड़ने के बाद प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का सर्वाधिक दाम मिलना सुनिश्चित हो जाता है। किसान की उपज का सेम्पल मंडियों में रहता है। ई प्लेट फार्म पर इसकी फोटो और गुणवत्ता दिखकर बोली लगाई जाती है। अनाज की गुणवत्ता और मापदंड के हिसाब से देशभर की मंडियों में जो अनाज की कीमत उस समय चल रही होती है। वे दरें रोजाना आॅनलाइन घोषित की जाती हैं।
मध्यप्रदेश के किसान की फसल  यदि बेचना हो तो जो दर उस प्रकार के अनाज की तय होती है वह मूल्य किसान को मिल जाता है। इससे फायदा यह होता है कि किसान जिस क्षेत्र में अनाज या उद्यानिकी फसल लेता है और राष्टÑीय स्तर पर उसकी फसल की गुणवत्ता के हिसाब से जो दर तय होती है वह कीमत उसे यहां मिल जाती है। जबकि स्थानीय मंडियों में वहां अधिक उत्पादन के कारण उसे ज्यादा दर नहीं मिल पाती है।
अब तक किसानों ने 211 करोड़ की फसल बेची- प्रधानमंत्री द्वारा करोंद मंडी को कृषि बाजार योजना से जोड़े जाने के बाद अब तक पचास मंडिया इस योजना से जोड़ी जा चुकी है। इन मंडियो में ई-प्लेटफार्म पर एक लाख 15 हजार 105 किसानों से 17 हजार 856 व्यापारियों ने मसूर, सरसों, हरी मटर, उड़द, चना, ज्वार, मूंग, सोयाबीन, तुअर, मक्का आदि की 4 लाख 36 हजार 455 क्विंटल अनाज की बिक्री की जा चुकी है। इससे किसानों को 211 करोड़ 94 लाख रुपए

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