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साधौ ये मुर्दों का गांव

फारूख बिगाड़ रहे हैं घाटी का माहौल

जम्मू- कश्मीर जब भी पटरी पर आता दिखाई देता है, सैलानी डल झील की सैर के लिए आने को उतावले होने लगते हैं, कश्मीरी जनसमुदाय आतंक के साये से बाहर निकलने लगता है तभी यहां के नेता ऐसा माहौल तैयार करने लगते हैं कि शांतिप्रयासों को धक्का लगता है और विकास योजनाओं की गति थम जाती है। तथाकथित ये नेता सिर्फ अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए घाटी में शांति स्थापित होने में अडंगे पैदा करते हैं। अक्सर ये नेता पाकिस्तान के समर्थन में बयान देते हैं और भारत को चुनौती देने से नहीं चूकते कि वह पाक का कुछ बिगाड़ नहीं सकता। ऐसी परिस्थिति में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि आखिर ऐसे नेताओं की मंशा क्या है। इनकी राजनीतिक रोटियों को सेंकने के लिए आखिर कब तक इन्हें खुला रखा जायेगा। यह सीधे सीधे राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं और सरकार इनके खिलाफ कार्यवाही नहीं कर पा रही है, समझ से परे है कि क्या ये इतने ताकतवर हो चुके हैं कि इनको जेल नहीं भेजा जा सकता। यदि घाटी के लोगों को भारतीयता सिखाना है तो उन्हें कुछ सबक और कुछ रियायत देना होगी। कश्मीर को जिन संवैधानिक जंजीरों से बांध कर रखा गया है उन्हें बिना खोले कश्मीर आजाद नहीं हो सकता। अकेले विधानसभा चुनाव करा लेने और वहां सरकार बना देने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि वहां राजनीति कर रहे नेताओं की मानसिकता भारतीयता से अभी कोसो दूर है, वहां का जनमानस अब भी तिरंगे के स्थान पर पाक के ध्वज को इज्जत देता है। फिलहाल तो संदर्भ सिर्फ इतना है कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.फारूख अब्दुल्ला ने कश्मीर के विवादित हिस्से को लेकर एक बार फिर बयान देकर इस मुद्दे को दोबारा गरमा दिया है। उनका कहना है कि दिल्ली के पास इतनी ताकत नहीं है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को फिर से हासिल कर सके। फारूक ने कहा कि ऐसी ही हालत इस्लामाबाद की भी है, क्योंकि उनके पास भी कश्मीर के इस हिस्से को लेने की क्षमता नहीं है। फारूक पाक को पीओके में पूर्ण स्वायतता की वकालत कर रहे हैं जिससे के वह पाकिस्तान का हिस्सा बन जाए। फारूख के इस बयान से साफ दिखाई दे रहा है कि वह पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं और वह पाक अधिकृत कश्मीर को पाक के हवाले कर भारत को चुपचाप बैठने का सुझाव दे रहे हैं। फारूख का यह बयान केंद्र सरकार को सीधे चुनौती देने वाला है इसे मोदी को चुनौती के रूप में भी देखा जा सकता है। इधर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फारूख के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी इसमे कूदने की जरूरत नहीं है उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि मोदी सबसे अधिक रियासत के विकास पर ध्यान दे रहे हैं। मोदी सरकार आशा से अधिक सहायता कर रही है। कश्मीर में चल रही इस सियासत से वर्तमान जेके सरकार को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मौजूदा सरकार भी भाजपा को तवज्जो नहीं दे रही है। केंद्र को इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाना होंगे।

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