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साधौ ये मुर्दों का गांव

कर्ज और फर्ज की राजनीति

एक मां अपने पुत्र को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और शक्तिशाली राष्ट्र की बागडोर सौपनें को बेताब है। इस महिला की जीवटता को नमन करने का मन करता है क्योंकि इसने पति के मौत के बाद अपने देश जाने का मन नहीं बनाया, वह पीठ दिखाकर भागी नहीं, उसने अपने बच्चों को उनके पिता के देश में ही पालने का संकल्प लिया, उस देश के संस्कारों और संस्कृति का परिचय कराया, वह आतंकवादियों से डरी नहीं बल्कि उसका सामना करने का पाठ बच्चों को सिखाने में जीवन लगा दिया। उसके सामने मां का फर्ज था तो पति के प्रति वफादारी के प्रति प्रतिज्ञा। मां के फर्ज ने ही शायद उसे मजबूत राजनीतिक बना दिया जबकि उसका राजनीति से कोई वास्ता नहीं था यह विदेशी महिला अपने पायलट पति के साथ खुश थी बच्चे भी विदेश में पल बढ़ रहे थे उनके लिए भारत आना गर्मी की छुट्टियों में गांव आने जैसा था। वक्त ने इस तश्वीर ही नहीं तकदीर ही बदल दी। भविष्य को अपने पुत्र के रूप में सुरक्षित करने का सपना कौन मां नहीं देखती, यदि सोनिया गांधी ने अपने पुत्र राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखा है तो क्या बुरा किया। सोनिया पहले मां है फिर राजनेता। इसलिए वह पहले अपने पुत्र को सुरक्षित करना चाहती है क्योंकि उसी के सहारे तो बुढ़ापा गुजारना है, सोनिया देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल की मुखिया हैं जिस दल ने देश पर सर्वाधिक समय तक राज किया है, इस सच्चाई के बाद भी वह जानती हैं कि बुढ़ापे को राजनीति से रोका नहीं जा सकता, इस उम्र में उनकी पूछ परख भी नहीं होगी ऐसे में अपने पुत्र के प्रति उनके मोह के बढ़ने का मानव जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। देश में अकेली सोनिया ही नहीं बल्कि तमाम बूढ़े राजनेता अपनी संतानों को राजनीति के इस अखाड़े में उतार कर पहलवान बना रहे हैं। लालू यादव ने आखिर क्या किया पूरे परिवार को ही राजनीति में उतार दिया पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर दी। बेटी और बेटों का अपनी विरासत सौंपने की तैयारी कर ली, एक डिप्टी सीएम बन गया तो दूसरा मंत्री, बेटियों को भी दिल्ली दिखा दी। लालू की राजनीति भले ही अवसान की ओर न हो पर वह आम भारतीय बूढ़े की तरह बेटों के दम पर खटिया तोड़ना चाहते हैं। अभी उनके बेटों ने बाप के कर्ज को उतारने में जल्दबाजी नहीं की है, पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो अपनी इच्छा जाहिर कर दी है वह अपने पिता मुलायम सिंह यादव को दिल्ली की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, वह पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। यह है पितृऋण को समझने वाला राजनेता पुत्र। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में क्या समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को तैयार है? इस सवाल के जवाब में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर मुलायम सिंह यादव को देश का पीएम बनाया जाए और राहुल गांधी को डिप्टी पीएम तो वो हाथोंहाथ गठबंधन के तैयार हैं। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राहुल गांधी ने भी चुप्पी साध ली। राहुल गांधी से जब इस बयान पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई तो वो कुछ नहीं बोले।इस सवाल के जवाब में अखिलेश ने कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरे पिताजी का सपना भी पूरा हो। अगर पिताजी मुलायम सिंह को प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो मैं हर तरह के गठबंधन के लिए तैयार हूं। अखिलेश ने ये भी कहा कि राहुल गांधी उनके बहुत पुराने मित्र भी हैं। ये व्यक्तिगत संबंध राजनैतिक संबंधों में बदल सकते हैं? अखिलेश ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए दोस्ती को निभाने की बात भी कह दी है मतलब यह कि वह सोनिया गांधी से कही आगे की सोच लेकर चल रहे हैं। वैसे सोनिया गांधी को अब तक यह तो समझ में आ ही गया होगा कि उनके बिना राहुल का राजनीतिक भविष्य खतरे में है। इन तमाम बातों को आइने के सामने देखने पर प्रतीत तो यही हो रहा है कि राजनीतिक घरानों की ये नई पीढ़ी ऐसे गठजोड़ करेगी जिसकी कल्पना तक नहीं कर सकते। इस तरह के कर्ज और फर्ज की राजनीति पूरे देश में शुरू हो चुकी है।

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